मुश्किल घड़ी में इंसानियत की अनूठी मिसाल पेश करते हिन्दराइज फाउंडेशन के जांबाज़
| Updated: Jul 27, 2020 | Category: Blog

मुश्किल घड़ी में इंसानियत की अनूठी मिसाल पेश करते हिन्दराइज फाउंडेशन के जांबाज़

कोविड-19 के मरीजों की निरंतर बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने लॉकडाउन को लागू किया था। इस बात से तो हम सब वाकिफ़ है कि लॉकडाउन का सही से पालन करना कितना आवश्यक हो गया था और जब भी लॉकडाउन होता है देश के लोग लॉकडाउन के नियमों का पालन करके सरकार के नेक इरादों को बल देने का कार्य करते हैं। हम सबको पता है ऐसा करके हम ना सिर्फ खुद को बल्कि औरों को भी सुरक्षित करते हैं। हालांकि देशव्यापी लॉकडाउन लागू होने से सबसे ज़्यादा परेशानी का सामना जरूरतमंद लोगों को करना पड़ा है, और इस तथ्य को नकारा भी नहीं जा सकता। गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए ये कोरोना काल बेहद चुनौतियों भरा समय लेकर आया है जिसका सामना करने के लिए हिन्दराइज फाउंडेशन के सदस्य कोई कसर नहीं छोड़ रहे।

नरेंद्र कुमार के नेतृत्व में हिन्दराइज फाउंडेशन के सदस्यों ने जून के महीने में कैप्टन विजयंत थापर की पुण्यतिथि पर 500 गरीब एवं असहाय परिवारों को राशन सामग्री वितरित किया। संस्था के सदस्यों ने गरीब और बेसहारा लोगों को मास्क और सैनेटाइजर भी मुहैया कराया। कोविड-19 के नाम का दहशत कम होने का नाम नहीं ले रहा ऐसे में ज़रूरत है लोगों को एकजुट होकर सामाजिक दूरी का पालन करते हुए गरीब दिहाड़ी मज़दूरों और उनके परिवार वालों की मदद करने की।

आत्मनिर्भर भारत फॉर्मूला के अन्तर्गत हिन्दराइज फाउंडेशन ने उन प्रवासी श्रमिकों को रोज़गार और प्रशिक्षण देने का कार्य किया है जो कपड़ा कारखानों और अलग-अलग कारखानों में कार्यरत थे और अपनी नौकरी गंवा बैठे हैं। हिन्दराइज फाउंडेशन के सदस्यों ने उनके आत्मनिर्भर रोज़गार सृजन के लिए उन्हें मशीनें प्रदान की हैं जिसकी मदद से वो उच्च स्तरीय मास्क बना रहे हैं। हिन्दराइज फाउंडेशन के सदस्य सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर बचाव और राहत का उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं और कोरोना महामारी से निपटने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

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